ujiyarpur news : RJD विधायक आलोक मेहता को जनता ने घेरा, वादे पूरे न करने पर जताई नाराज़गी

Ujiyarpur news
samastipur जिले के उजियारपुर क्षेत्र में उस समय गर्म माहौल बन गया जब राजद (RJD) के विधायक Alok Mehta अपने क्षेत्र के लोगों से जन संवाद करने पहुँचे। जनता ने उन्हें चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा न करने के आरोप में घेर लिया। आरोपों और नाराज़गी के चलते विधायक को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आलोक मेहता अपने समर्थकों के साथ उजियारपुर में जन संवाद कार्यक्रम के लिए पहुँचे थे।
शुरुआत में कार्यक्रम सामान्य रूप से चल रहा था, लेकिन जैसे ही लोगों को माइक मिला, उन्होंने विधायक से उनकी चुनावी घोषणाओं और विकास कार्यों पर सवाल उठाना शुरू कर दिया।
लोगों का आरोप था कि क्षेत्र में सड़कों, स्वास्थ्य सेवाओं, जल निकासी, बेरोज़गारी और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन जैसे मुद्दों पर विधायक ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। कई लोगों ने कहा कि चुनाव के समय जो वादे किए गए थे, वे आज तक अधूरे हैं।
जन संवाद के दौरान माहौल तब और गरम हो गया जब विधायक आलोक मेहता ने मौजूद मीडिया और युवाओं से कैमरा बंद करने का आग्रह किया। स्थानीय लोगों के अनुसार, कैमरा बंद करने का कारण यह था कि विधायक नहीं चाहते थे कि यह पूरा घटनाक्रम सोशल मीडिया पर वायरल हो।
लेकिन उपस्थित युवाओं और नागरिकों ने कैमरा बंद करने से मना कर दिया। इस पर विधायक और उनके समर्थकों के बीच बहस की स्थिति बन गई। लोगों ने आरोप लगाया कि जब जनता सवाल पूछ रही है तो कैमरा क्यों बंद किया जाए
कार्यक्रम में आए कई ग्रामीणों ने कहा कि विकास कार्य ठप हैं, योजनाएँ कागजों में सिमट गई हैं और विधायक सिर्फ चुनाव के समय दिखते हैं। मौके पर मौजूद कुछ महिलाओं ने भी अपने गाँवों में जल-निकासी, सड़क और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर नाराज़गी जताई।
लोगों ने यहाँ तक कहा कि जन प्रतिनिधि जनता के सवालों का सामना करने के बजाय कैमरा बंद करवाकर बचने की कोशिश कर रहे हैं
बताया जा रहा है कि बढ़ते विवाद और माहौल को देखते हुए आलोक मेहता ने कार्यक्रम को बीच में ही छोड़ दिया। उपस्थित लोगों ने इसे ‘दुम दबाकर भागना’ बताया, जबकि विधायक समर्थकों ने इसे सुरक्षा कारणों से उठाया गया कदम कहा।
हालाँकि इस घटना पर विधायक आलोक मेहता की ओर से अभी तक कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की घटनाएँ आगामी चुनाव में जनप्रतिनिधियों की छवि पर सीधा असर डालती हैं। जनता अब सोशल मीडिया के ज़रिए अपने नेताओं को सीधे घेर रही है।
ऐसे में विधायक और अन्य प्रतिनिधियों के लिए यह ज़रूरी हो गया है कि वे क्षेत्र में किए गए वादों को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखें
उजियारपुर की यह घटना यह साफ संकेत देती है कि जनता अब सिर्फ चुनावी वादों से संतुष्ट नहीं है। विकास कार्य, पारदर्शिता और जनता के सवालों का सीधा जवाब देना आज के दौर की राजनीतिक ज़रूरत बन चुका है।
विधायक आलोक मेहता के लिए यह घटना एक सबक हो सकती है कि जनता की नाराज़गी और सवालों को अनदेखा करना अब आसान नहीं है
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